Visit blogadda.com to discover Indian blogs कठफोड़वा: श्रीकाकुलम

श्रीकाकुलम

(the gun is not in the hands of the peoples-JP)
एक आदमी-
दुसरे आदमी की गर्दंन
धड़ से
अलग कर देता है

जैसे एक मिस्त्री बलतू से
नट अलग करता है

तुम कहते हो- यह हत्या हो रही है
मै कहता हूँ- मेकेनिज्म टूट रहा है

नही इस तरह चेहरा
मत सिकोड़ो और ना कंधे ही
उचकाओ 
मुझे मालूम है- सबूत के लिए
तुम  कह सकते हो की खून
बह रहा है.
लेकिन इतना ही काफी नही है
और खून का रंग लाल है

असली सवाल है यह जानना
की बहता हुआ खून क्या कह रहा है

यह हत्याकांड नही है सिर्फ लोहे को
एक नया नाम दिया जा रहा है

और सबूत के लिए यदि तुम
देखना ही चाहते हो
तो चलो मेरे साथ
में तुम्हे दिखलाता हूँ भाषा के जंगल में
कविता का वह वर्जित प्रदेश
जहाँ कायरता
एक खाली तमंचा फ़ेंक कर
भाग गयी है और साहस 
चन्द पके हुए बालों के साथ
आगे भाग गया है-
अँधेरे में
धूमिल

Comments :

1
संजय भास्कर ने कहा…
on 

बहुत खूब, लाजबाब !

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