Visit blogadda.com to discover Indian blogs कठफोड़वा: February 2012

पागलपन

कुलबुला रहीं हैं
सारी समस्याएँ
अपनी उलझनों के साथ
और बड़बड़ाहट के रूप में 
बाहर आ रहा है 
मेरा खुद का पागलपन 

न जाने कब 
मैंने खुद से 
बातें करना सीख लिया    

नीरज कुमार
(१३/०७/०४)
(गोरखपुर रेलवे स्टेशन)