Visit blogadda.com to discover Indian blogs कठफोड़वा: कविता
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बाढ़ किसी भी वक़्त आ सकती है

इस कविता की हस्तलिखित प्रति मेरे पास सुरक्षित है और कवि का हस्ताक्षर है नाम नहीं है। जिस कवि की ये रचना हो वो कृपया सूचित करे जिससे उसके नाम पर इसे दुबारा प्रकाशित किया जा सके- सूर्या

देह की तलहटी में जमी हुई काई

और गुस्से के उपर

ठहरा हुआ रक्त

चरमराती हुई हड्डियों

से पूछता है

कब तक चलेगा बाँध?

बाढ़ किसी भी वक़्त आ सकती है.

हर बार नए साल का सूरज करता है हमसे वायदा

हर बार नए साल का सूरज करता है हमसे वायदा


कि

इस साल खत्म कर दूंगा
कुपोषण, भ्रष्टाचार, गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, अनाचार
इस नए साल मैं मिलेगी सभी को सूचना
मिलेगा सभी को काम और काम का पूरा दाम
लेकिन नहीं निभाता है यह वायदा अपना !!!!!

हम भी तो करने देते हैं सूरज को बेवफाई

उम्मीद है इस साल
सूरज को हम नहीं सोने देंगे
उसे जगाते रहेंगे और कराएँगे उससे हर वायदा पूरा
इस नए साल मैं |

नया साल मुबारक

2010 उन सभी चेहरों पर मुस्कान बिखेरे जो तरस रहे हैं एक अदद मुस्कान के लिए !!